बच्चे तितली का पंख हो जाएँ
या मेरी तरह बेरंग हो जाएँ ,
मंज़िल सबकी बेशक अलग हों
मगर रास्ते मे हम संग हो जाएँ.
रात मे घर से निकला
तो चाँद बोला कि मै भी साथ चलुगा
पूरे सफ़र वो साथ ही चलता रहा
रात भर तक तो साथ ही था
सुबह सुबह पता नही कहा चला गया
शायद ................. किसी और के साथ
सफ़र का साथ देने
सबका चाँद एक ही तो है
यार कही वो तुम्हारे साथ तों नही
झूठ है कि सच मुझे मालूम नही
तू है क्या मुझे मालूम नही
मै मै हू बस इतना पता है...
मै अपने घर मे ही ठीक हू
खिड़कियो से बाहर झाकना मेरी आदत नही
आज खोली है पुरानी अलमारीइसमे से निकाली है पुरानी किताबेइन पर से हटानी है धूलजी तो चाहता है की इनमे आग लगा दू......इन किताबो ने छीना है मेरा बचपनमेरे खेलने के वक़्त को इन्होने हमेशा कम किया हैलेकिन इन्हे निकाला गया है अगली पीढ़ी के लिएवो भी पढ़ेगे इन्हेहटाएगे धूल..............और फिर मेरी तरहअपना बचपन खो देगे........
ना वो हम हैना वो तुम होना कसमेना वादेहम चौराहे पर आ चुके हैइतने लंबे सफ़र मेंवो कसमेवो वादेवहीं गलियों मे ही छूट गयेऔर लोग आएगेवो भी उठाएगेउन कसमो कोउन वादों कोलेकिन जब उन्हे आना होगा चौराहे परवो फिर उन्हे गलियों मे ही छोड़ आएगे.