मगर दरिया कि तरह अकेला नही हू मै
जिस राह पर सबने यहा पाई मंज़िल
मुझे जुनून कि उस पर चलता नही हू मै
हवा ज़िद पर कायम मुजे उड़ाने के लिए
उसे बता दो कोई कतरा नही हू मै
मागता है वो मंदिर मे भगवान से मुझे
मोहब्बत मे आसानी से मिलता नही हू मै
यह जानता हू कि समंदर नही हू मै मगर दरिया कि तरह अकेला नही हू मै
जिस राह पर सबने यहा पाई मंज़िल मुझे जुनून कि उस पर चलता नही हू मै हवा ज़िद पर कायम मुझे उड़ाने के लिए उसे बता दो कोई कतरा नही हू मै
मागता है वो मंदिर मे भगवान से मुझे मोहब्बत मे आसानी से मिलता नही हू मै
Bahut Achha!
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